तुम भी तो एक औरत हो आभा
तुम्हें तो पता होना चाहिए
इज्जत की अहमियत क्या है
भारतीय समाज में
जिस व्यक्ति को बचाने
तुम कर रही हो जीतोड़ कोशिश
उसे एकांत में दे पाती हो सम्मान
एक पति या बच्चों के पिता का?
अदालत से निकलते हुए
तुम्हारे चेहरे की बनावटी मुस्कान
कर रही थी चुगली
कि छुपा रही हो बहुत कुछ
सिर्फ चोर की दाढ़ी में नही होता तिनका
उसके साथी को भी सताता है भय
किसी भी क्षण पकड़े जाने का
और तुम तो बन चुकी हो संरक्षक
कोई अदालत नहीं दे सकती
तुम्हें इसके लिए सजा
तुम खुद बन जाआोगी
गुनहगार अपनी नजरों में
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गुरुवार, जनवरी 07, 2010
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